यूरोप में फंसने या वेतन न मिलने पर MADAD और ICWF से मदद कैसे लें
विदेश मंत्रालय का MADAD पोर्टल 21 फरवरी 2015 से कांसुलर शिकायतें दर्ज करता है, और ICWF से आश्रय, वापसी का टिकट तथा कानूनी सहायता मिल सकती है।
यूरोप में काम कर रहे किसी भारतीय नागरिक का वेतन रुक जाए, पासपोर्ट रोक लिया जाए या नौकरी ही खत्म हो जाए, तो दो रास्ते हैं। शिकायत विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल पर दर्ज होती है, जो 21 फरवरी 2015 से चल रहा है, और खर्च की मदद Indian Community Welfare Fund से आती है, जिसे संबंधित भारतीय दूतावास चलाता है।
MADAD पोर्टल, शिकायत कहां जाती है और कौन उसे देखता है
MADAD विदेश मंत्रालय की कांसुलर शिकायत प्रणाली है। विदेश मंत्रालय के अनुसार इसे 21 फरवरी 2015 को शुरू किया गया था, और इसका पूरा ढांचा एक ही काम के लिए बना है: शिकायत ऑनलाइन दर्ज हो, उसकी स्थिति आवेदक खुद देख सके, और जवाब न आने पर वह ऊपर के स्तर तक बढ़ाई जा सके। यही तीन चीज़ें, दर्ज करना, ट्रैक करना और एस्केलेट करना, इसे दूतावास को भेजे गए एक साधारण ईमेल से अलग करती हैं, क्योंकि ईमेल का कोई नंबर नहीं होता और उसकी कोई समय सीमा भी दर्ज नहीं होती।
शिकायत कहीं अटकती नहीं है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक सभी भारतीय मिशन और पोस्ट इस प्रणाली से जुड़े हैं, साथ ही चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद और कोलकाता के शाखा सचिवालय भी। इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि भारत में बैठा परिवार वही शिकायत दर्ज कर सकता है जो विदेश में बैठा कामगार दर्ज करता, और वह उसी मिशन तक पहुंचेगी जिसके अधिकार क्षेत्र में कार्यस्थल आता है। जिस कामगार का फोन जब्त हो चुका है या जिसके पास इंटरनेट नहीं है, उसके मामले में यही रास्ता काम आता है।
श्रेणियां भी तय हैं। विदेश मंत्रालय MADAD में वेतन न मिलना, श्रम विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, हिरासत या गिरफ्तारी, और लापता व्यक्ति जैसी श्रेणियां रखता है। शिकायत दर्ज करते समय सही श्रेणी चुनना मामूली बात नहीं लगती, पर यही तय करता है कि फाइल दूतावास के किस अनुभाग तक जाएगी। वेतन के मामले को उत्पीड़न में दर्ज करने पर वह श्रम अनुभाग के बजाय कहीं और खुलेगा और जवाब में देरी होगी।
ICWF, पैसा किस चीज़ के लिए मिलता है
MADAD शिकायत का रास्ता है, पैसे का नहीं। खर्च Indian Community Welfare Fund से आता है, जिसे विदेश मंत्रालय ने 2009 में बनाया और जिसके संशोधित दिशानिर्देश 1 सितंबर 2017 से लागू हैं। यह कोष अब हर भारतीय मिशन पर उपलब्ध है, इसलिए यह सवाल नहीं रह जाता कि कोई देश इस दायरे में आता है या नहीं।
| स्थिति | ICWF से क्या मिल सकता है | कौन देता है |
|---|---|---|
| नौकरी छूटी, रहने की जगह नहीं | अस्थायी आश्रय और भोजन | संबंधित भारतीय दूतावास |
| भारत लौटना है, पैसा नहीं है | भारत वापसी का हवाई टिकट | संबंधित भारतीय दूतावास |
| वेतन या श्रम विवाद अदालत तक गया | वकील की फीस और कानूनी सहायता | संबंधित भारतीय दूतावास |
| कार्यस्थल पर मृत्यु | पार्थिव शरीर की भारत वापसी का खर्च | संबंधित भारतीय दूतावास |
दो शर्तें साफ़ हैं और इन्हीं पर अधिकतर आवेदन रुकते हैं। पहली, विदेश मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार सहायता आय और साधनों की जांच के आधार पर दी जाती है, यानी दूतावास पहले यह देखता है कि आवेदक या उसका नियोक्ता खुद यह खर्च उठा सकता है या नहीं। दूसरी, यह कोष केवल भारतीय नागरिकों के लिए है। PIO और OCI कार्ड रखने वाले इसके पात्र नहीं हैं, भले ही उनका जन्म भारत में हुआ हो।
नियोक्ता और भर्ती एजेंसी इस रास्ते को कैसे छोटा कर सकते हैं
यूरोप में भारतीय कामगारों को भेजने वाले नियोक्ता के लिए इसका व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि दूतावास तक पहुंचने से पहले ही अधिकतर विवाद कागज़ों में तय हो जाते हैं। रोज़गार अनुबंध में वेतन, कार्य के घंटे और आवास साफ़ लिखे हों तो श्रम विवाद वाली MADAD फाइल में दूतावास के पास तुलना करने लायक एक दस्तावेज़ होता है। इसका ब्योरा रोज़गार अनुबंध की जांच में है, और जिन प्रस्तावों की शुरुआत ही संदिग्ध होती है उनके संकेत फर्ज़ी नौकरी और अवैध भर्ती में दिए गए हैं।
भर्ती करने वाली एजेंसी का eMigrate पंजीकरण भी यहीं मायने रखता है, क्योंकि पंजीकृत भर्ती एजेंट के मामले में भारत में भी एक अलग शिकायत रास्ता खुला रहता है। एजेंट की जांच का तरीका eMigrate पंजीकरण और भर्ती एजेंट में समझाया गया है।
विदेश मंत्रालय MADAD पर शिकायत दर्ज करने का कोई शुल्क नहीं लेता, और ICWF से मिलने वाली सहायता भी लौटाने योग्य कर्ज़ नहीं है, इसलिए लागत का सवाल आवेदन रोकने की वजह नहीं होना चाहिए।
किसी संकट में क्रम सीधा है। पहले MADAD पर सही श्रेणी के साथ शिकायत दर्ज करें और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें, फिर उसी मिशन से ICWF सहायता का अनुरोध करें, और पासपोर्ट, अनुबंध तथा वेतन पर्चियों की प्रतियां तैयार रखें। दूतावास के पास जितना ज़्यादा दस्तावेज़ पहले दिन पहुंचता है, फाइल उतने ही कम चक्कर लगाती है।
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