यूरोप की नौकरी का अनुबंध हस्ताक्षर से पहले क्या जांचें
Directive 2019/1152 के अनुसार नियोक्ता को मुख्य शर्तें सात दिन में लिखित देनी होती हैं और विदेश भेजे जा रहे कर्मचारी को रवानगी से पहले।
यूरोपीय संघ में काम की शर्तें लिखित में देना नियोक्ता की कानूनी बाध्यता है। Directive (EU) 2019/1152 के अनुच्छेद 5 के अनुसार मुख्य शर्तें पहले कार्यदिवस से सातवें कैलेंडर दिन तक देनी होती हैं और बाकी एक महीने के भीतर। अनुच्छेद 7 के अनुसार विदेश भेजे जा रहे कर्मचारी को यह जानकारी रवानगी से पहले मिलनी चाहिए।
इसका मतलब यह है कि जो कागज़ आपको भारत में दिखाया जा रहा है, वह शिष्टाचार नहीं है। वह वही दस्तावेज़ है जिस पर बाद में गंतव्य देश का श्रम निरीक्षक और अदालत दोनों भरोसा करेंगे। इसलिए जांच हस्ताक्षर से पहले होनी चाहिए, बाद में नहीं, क्योंकि सिंगल परमिट आम तौर पर एक ही नामित नियोक्ता से बंधा होता है और नौकरी बदलना प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है। यह ढांचा सिंगल परमिट की व्याख्या में समझाया गया है।
अनुबंध में कौन सी बातें होनी ही चाहिए
Directive 2019/1152 के अनुच्छेद 4 में उन बातों की सूची है जो नियोक्ता को लिखित में बतानी होती हैं: दोनों पक्षों की पहचान, काम की जगह, पद और काम का विवरण, शुरू होने की तारीख, अवधि तय हो तो समाप्ति की तारीख, परिवीक्षा की शर्तें, प्रशिक्षण का अधिकार, सवेतन छुट्टी, नौकरी समाप्त करने की प्रक्रिया, वेतन का ब्योरा, काम के घंटों की व्यवस्था, और सामाजिक सुरक्षा संस्था का नाम। मौसमी काम पर Directive 2014/36/EU के अनुच्छेद 6 में भी यही मांग है, जहां आवेदन के साथ ऐसा अनुबंध या बाध्यकारी प्रस्ताव लगाना पड़ता है जिसमें जगह, काम का प्रकार, अवधि, वेतन, घंटे और छुट्टी दर्ज हों।
| शर्त | निर्देश और अनुच्छेद | संख्या |
|---|---|---|
| मुख्य शर्तें लिखित में | Directive 2019/1152, अनुच्छेद 5 | पहले कार्यदिवस से सातवें कैलेंडर दिन तक |
| बाकी जानकारी | Directive 2019/1152, अनुच्छेद 5 | एक महीने के भीतर |
| विदेश भेजे जा रहे कर्मचारी को जानकारी | Directive 2019/1152, अनुच्छेद 7 | रवानगी से पहले |
| परिवीक्षा अवधि की ऊपरी सीमा | Directive 2019/1152, अनुच्छेद 8 | छह महीने |
| बेहतर शर्तों के अनुरोध का उत्तर | Directive 2019/1152, अनुच्छेद 12 | छह महीने की सेवा के बाद, उत्तर एक महीने में |
| परमिट पर फैसला, Croatia | Aliens Act की धारा 91(8) | पूरी फाइल पर 90 दिन तक |
अनुच्छेद 7 की पंक्ति सबसे उपयोगी है। विदेश भेजे जा रहे कर्मचारी को रवानगी से पहले यह भी बताना होता है कि वह किस देश या देशों में जाएगा, कितने समय के लिए, वेतन किस मुद्रा में मिलेगा, कौन से लाभ मिलेंगे, और वापसी की शर्तें क्या हैं। अगर यह जानकारी हवाई टिकट के बाद आ रही है, तो प्रक्रिया पहले ही नियम से बाहर है।
जिन तीन जगहों पर अनुबंध चुप रहता है
पहली, वेतन का सकल और शुद्ध अंतर। अनुबंध में अक्सर सकल मासिक वेतन लिखा होता है और भारत में उसी को हाथ में आने वाली रकम बताकर पेश किया जाता है। सामाजिक सुरक्षा और आयकर की कटौती के बाद फर्क बड़ा होता है, इसलिए लिखवाइए कि आंकड़ा सकल है या शुद्ध।
दूसरी, आवास और उसका किराया। मौसमी काम पर Directive 2014/36/EU के अनुच्छेद 20 में साफ़ है कि नियोक्ता की व्यवस्था वाला किराया शुद्ध वेतन की तुलना में अत्यधिक नहीं हो सकता, वेतन से अपने आप नहीं काटा जा सकता, और कर्मचारी को लिखित किरायानामा मिलना चाहिए। अगर अनुबंध में किराए की रकम नहीं लिखी है, तो वह रकम बाद में तय होगी और तब बातचीत की स्थिति आपके पक्ष में नहीं होगी।
तीसरी, ओवरटाइम और घंटे। काम के घंटों की व्यवस्था अनुच्छेद 4 की सूची में है, पर व्यवहार में यह पंक्ति सबसे ज़्यादा खाली छोड़ी जाती है।
वह विफलता जो तीन महीने बाद दिखती है
एक ठोस उदाहरण। कर्मचारी एक अंग्रेज़ी अनुवाद पर हस्ताक्षर करता है जिसमें 1,400 यूरो लिखा है। यूरोप पहुंचने पर जो स्थानीय भाषा वाला अनुबंध सामने आता है, उसमें वही 1,400 यूरो सकल है, आवास का 250 यूरो वेतन से कटता है, और परिवीक्षा छह महीने की है। तीन महीने बाद काम की मात्रा घटती है, कर्मचारी शिकायत करता है, और उसे बताया जाता है कि उसने हस्ताक्षर किए हुए हैं। वह सही भी है और गलत भी, क्योंकि जिस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर हुए वह वही नहीं था जिस पर प्रक्रिया चल रही थी।
बचाव एक वाक्य में है: दोनों भाषाओं वाली प्रति मांगिए, और जो अंक आप याद रखना चाहते हैं वे दोनों में एक जैसे हों। जिन कारणों से फाइलें ठुकराई जाती हैं वे परमिट अस्वीकार होने के कारण में दर्ज हैं, और एजेंट को कितना देना कानूनी है यह भर्ती एजेंट के सेवा शुल्क में। नियोक्ता की तरफ यह कड़ी कैसे बनती है, यह नियोक्ताओं के लिए पन्ने पर दर्ज है।
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