भर्ती एजेंट का सेवा शुल्क, यूरोप की नौकरी पर कितना कानूनी है
विदेश मंत्रालय की सलाह के अनुसार भर्ती एजेंट अधिकतम 30,000 रुपये और 18 प्रतिशत GST ले सकता है। Croatia में परमिट का सरकारी शुल्क 74.32 यूरो है।
विदेश मंत्रालय की सार्वजनिक सलाह के अनुसार पंजीकृत भर्ती एजेंट किसी उत्प्रवासी से अधिकतम 30,000 रुपये और उस पर 18 प्रतिशत GST ले सकता है, यानी कुल 35,400 रुपये। इसी सलाह में मंत्रालय लिखता है कि अपंजीकृत एजेंट 2 से 5 लाख रुपये तक वसूल रहे हैं। यह अंतर ही पूरी समस्या है।
एक बात पहले साफ़ कर लें। यह सीमा उस सेवा पर लगती है जो भर्ती एजेंट कर्मचारी के लिए करता है। यूरोप में परमिट की सरकारी फीस इससे अलग और बहुत छोटी है। Croatia के गृह मंत्रालय की शुल्क सूची के अनुसार निवास और कार्य परमिट जारी करने का शुल्क 74.32 यूरो है, बायोमेट्रिक कार्ड 31.85 यूरो, और दस्तावेज़ जारी करने का 9.29 यूरो। पूरी सरकारी लागत लगभग 115 यूरो बैठती है, और वह भी आम तौर पर नियोक्ता की फाइल का हिस्सा होती है।
सीमा कहां लिखी है और दो आंकड़े क्यों घूम रहे हैं
यहां एक विसंगति है जिसे जान लेना बेहतर है। विदेश मंत्रालय के भर्ती एजेंट पृष्ठ पर आज भी पुराना सूत्र दर्ज है: रोज़गार अनुबंध के अनुसार 45 दिन के वेतन के बराबर, अधिकतम 20,000 रुपये। वहीं मंत्रालय की मौजूदा सलाह, जो भारतीय मिशनों की वेबसाइटों पर भी प्रकाशित है, 30,000 रुपये और 18 प्रतिशत GST कहती है। व्यवहार में जो आंकड़ा गिना जाता है वह 30,000 वाला है, पर दोनों में से कोई भी 2 लाख के आसपास नहीं है। जब कोई एजेंट कहे कि यूरोप के लिए नियम अलग हैं, तो वह किसी तीसरे आंकड़े की बात कर रहा है जो कहीं लिखा ही नहीं है।
| मद | कौन तय करता है | रकम |
|---|---|---|
| भर्ती एजेंट का सेवा शुल्क | विदेश मंत्रालय की सलाह | 30,000 रुपये और 18 प्रतिशत GST |
| वही शुल्क, मंत्रालय के पुराने पृष्ठ पर | विदेश मंत्रालय का RA पृष्ठ | 45 दिन का वेतन, अधिकतम 20,000 रुपये |
| प्रवासी भारतीय बीमा योजना का प्रीमियम | विदेश मंत्रालय की सलाह | दो साल के लिए 275 रुपये, तीन साल के लिए 375 रुपये |
| बीमा कवर | प्रवासी भारतीय बीमा योजना | 10 लाख रुपये |
| निवास और कार्य परमिट, Croatia | गृह मंत्रालय की शुल्क सूची | 74.32 यूरो |
| अपंजीकृत एजेंट जो वसूलते हैं | विदेश मंत्रालय की सलाह में दर्ज | 2 से 5 लाख रुपये |
बीमा वाली पंक्ति पर रुकिए। 10 लाख रुपये के कवर का प्रीमियम दो साल के लिए 275 रुपये है। यह इतनी छोटी रकम है कि इसे कर्मचारी से अलग से वसूलना अपने आप में एक संकेत है कि हिसाब ईमानदार नहीं है।
यूरोप की तरफ नियम क्या कहता है
यूरोपीय संघ का कानून भी इसी दिशा में चलता है। मौसमी कामगारों पर Directive 2014/36/EU के अनुच्छेद 19 में लिखा है कि नियोक्ता यात्रा और बीमा का खर्च उठा सकता है, पर उसे कर्मचारी से वापस वसूल नहीं सकता। इसी निर्देश में यह भी है कि शुल्क अनुपातहीन या अत्यधिक नहीं होने चाहिए। जिन कंपनियों के लिए हम काम करते हैं, उनके लिए यह केवल नैतिकता का सवाल नहीं है, क्योंकि यही बिंदु निरीक्षण में पकड़ा जाता है।
नेपाल की तरफ यही सिद्धांत शून्य लागत भर्ती के नाम से चलता है और उसका ब्योरा नैतिक भर्ती और शून्य लागत में है। भारत से यूरोप के गलियारे में फर्क केवल कानून के नाम का है, तर्क वही है: जिस खर्च से नियोक्ता को फायदा होता है, वह नियोक्ता का खर्च है।
जहां पैसा दिखना बंद हो जाता है
असली विफलता रसीद पर होती है। कर्मचारी 1,80,000 रुपये देता है, जिसमें से 35,400 रुपये की एक रसीद बनती है और बाकी नकद रहता है। नकद वाले हिस्से को टिकट, चिकित्सा जांच, भाषा कक्षा और दस्तावेज़ों के नाम पर बताया जाता है, पर उन तीनों का कोई बिल नहीं दिया जाता। वीज़ा आ जाए तो कोई शिकायत नहीं करता। वीज़ा न आए तो शिकायत केवल 35,400 रुपये की बनती है, क्योंकि बाकी रकम कागज़ पर कभी दी ही नहीं गई।
इसका उपाय सरल है और भुगतान से पहले ही काम करता है। हर भुगतान की रसीद उसी पंजीकृत नाम से लें जो सूची में दर्ज है, हर मद अलग लिखवाएं, और वह सब लिखित में मांगें जिसे एजेंट सेवा बता रहा है। एजेंट की जांच का तरीका eMigrate पर पंजीकरण और भर्ती एजेंट की जांच में है, और परमिट में असल में कितना समय लगता है यह देश दर देश समयरेखा में। नियोक्ता किस हिस्से का खर्च उठाता है, यह नियोक्ताओं के लिए पन्ने पर दर्ज है।
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