परिवार को यूरोप बुलाना, भारतीय कामगारों के लिए पारिवारिक पुनर्मिलन के नियम
Council Directive 2003/86/EC के तहत प्रायोजक को कम से कम 1 साल का वैध निवास परमिट चाहिए, और सदस्य देश पुनर्मिलन से पहले 2 साल तक की प्रतीक्षा रख सकते हैं।
यूरोपीय संघ में काम कर रहा भारतीय कामगार अपने परिवार को Council Directive 2003/86/EC के तहत बुला सकता है, जो 22 सितंबर 2003 को अपनाया गया था। इसके लिए प्रायोजक के पास कम से कम एक साल का वैध निवास परमिट, पर्याप्त आय, आवास और बीमा होना चाहिए, और सदस्य देश अधिकतम दो साल की प्रतीक्षा अवधि रख सकते हैं।
प्रायोजक की शर्तें, कागज़ पर क्या देखा जाता है
इस निर्देश का अनुच्छेद 3 प्रायोजक के लिए दो चीज़ें मांगता है। पहली, कम से कम एक साल की वैधता वाला निवास परमिट। दूसरी, स्थायी निवास मिलने की उचित संभावना, यानी अधिकारी यह देखते हैं कि यह ठहराव कुछ महीनों का अस्थायी प्रवास तो नहीं है। मौसमी काम पर आया कामगार इसी शर्त पर बाहर रह जाता है, भले ही उसका अनुबंध वैध हो।
अनुच्छेद 7 उन साधनों की बात करता है जिन पर अधिकतर आवेदन तय होते हैं। प्रायोजक को दिखाना होता है कि उसके पास परिवार के लिए सामान्य मानी जाने वाली आवास व्यवस्था है, स्वयं और परिवार के लिए बीमा है, और इतनी स्थिर आय है कि परिवार को सामाजिक सहायता पर निर्भर न होना पड़े। आय की गणना हर देश अपने न्यूनतम वेतन और सामाजिक सहायता की दरों से जोड़कर करता है, इसलिए एक ही वेतन एक देश में पर्याप्त और दूसरे में अपर्याप्त हो सकता है।
निर्देश यह भी तय करता है कि परिवार में कौन गिना जाएगा और जवाब में कितना समय लग सकता है। अनुच्छेद 4(1) जीवनसाथी और नाबालिग बच्चों को अनिवार्य श्रेणी बनाता है, यानी शर्तें पूरी होने पर सदस्य देश को उनके आने की अनुमति देनी ही होती है। माता पिता, वयस्क अविवाहित बच्चे और बिना विवाह के साथी अनुच्छेद 4(2) और 4(3) में हैं, जिन्हें हर देश चाहे तो खोल सकता है और चाहे तो बंद रख सकता है, और ज्यादातर देश इन्हें बंद ही रखते हैं। अनुच्छेद 5(4) इंतज़ार की सीमा बांधता है: आवेदन दाखिल होने के नौ महीने के भीतर फैसला लिखित रूप में देना होता है, और जांच सचमुच जटिल होने पर ही यह अवधि बढ़ाई जा सकती है। आवेदन मंजूर होने पर अनुच्छेद 13 परिवार के सदस्य को कम से कम एक साल की वैधता वाला पहला निवास परमिट देता है।
अनुच्छेद 8 प्रतीक्षा की अनुमति देता है। सदस्य देश यह शर्त रख सकता है कि प्रायोजक पहले उसके यहां अधिकतम दो साल वैध रूप से रह चुका हो, तभी पुनर्मिलन का आवेदन स्वीकार हो। यही वह बिंदु है जहां व्यावहारिक फर्क सबसे बड़ा होता है। जिस देश में यह शर्त एक साल की है, वहां भारत से आया एक welder दूसरे साल की शुरुआत में परिवार बुला सकता है, और जिस देश में यह दो साल है, वहां उसी अनुबंध पर वह तीसरे साल में पहुंचता है।
परिवार को अपना दर्जा कब मिलता है, और कहां यह नियम लागू नहीं है
शुरुआत में परिवार का निवास प्रायोजक से जुड़ा होता है, यानी जीवनसाथी का परमिट उसी कामगार के परमिट पर टिका रहता है। निर्देश का अनुच्छेद 15 इसे स्थायी नहीं छोड़ता। पांच साल के निवास के बाद जीवनसाथी और वयस्क हो चुके बच्चे अपने स्वतंत्र निवास परमिट के हकदार हैं। यह अलगाव, तलाक या नौकरी बदलने की स्थिति में मायने रखता है, क्योंकि उसके बाद परिवार का रुकना प्रायोजक के अनुबंध पर निर्भर नहीं रहता।
एक भौगोलिक अपवाद भी है जो योजना बनाते समय अक्सर छूट जाता है। EUR-Lex के अनुसार डेनमार्क और आयरलैंड इस निर्देश से बाहर हैं, इसलिए वहां पुनर्मिलन राष्ट्रीय कानून से चलता है और ऊपर दिए गए अनुच्छेद वहां लागू नहीं होते।
| विषय | Directive 2003/86/EC का नियम | कहां यह नहीं चलता |
|---|---|---|
| प्रायोजक का परमिट | कम से कम 1 साल की वैधता, अनुच्छेद 3 | डेनमार्क, आयरलैंड |
| प्रतीक्षा अवधि | सदस्य देश अधिकतम 2 साल रख सकता है, अनुच्छेद 8 | डेनमार्क, आयरलैंड |
| आय, आवास, बीमा | प्रायोजक को दिखाना अनिवार्य, अनुच्छेद 7 | डेनमार्क, आयरलैंड |
| स्वतंत्र परमिट | 5 साल बाद जीवनसाथी और वयस्क बच्चे, अनुच्छेद 15 | डेनमार्क, आयरलैंड |
नियोक्ता के लिए इसका मतलब
नियोक्ता के लिए यह विषय कर्मचारी के निजी जीवन का नहीं, टिकाऊपन का है। दो साल की प्रतीक्षा वाला देश उसी कामगार के लिए तीन साल का ठहराव मुश्किल बना देता है, और यह बात नौकरी छोड़ने के आंकड़ों में दिखती है। जिन रास्तों में पुनर्मिलन जल्दी खुलता है, जैसे EU Blue Card वाले रास्ते, वहां पारिवारिक शर्तें आमतौर पर हल्की होती हैं, और उनका ब्योरा EU Blue Card निर्देश में है।
पांच साल की गिनती एक और दरवाज़े पर भी काम करती है। उसी अवधि के बाद कामगार स्वयं दीर्घकालिक निवासी दर्जे के लिए पात्र होता है, जिसे EU दीर्घकालिक निवासी दर्जा में समझाया गया है। परमिट की शुरुआती समयरेखा, जिससे यह पूरा कैलेंडर शुरू होता है, देश दर देश समयरेखा में है।
भर्ती शुरू करने से पहले तीन संख्याएं पता कर लें: उस देश ने प्रतीक्षा अवधि कितनी रखी है, वहां आय की सीमा किस आंकड़े से जुड़ी है, और आवास के मानक क्या हैं। यही तीन बातें तय करती हैं कि परिवार दूसरे साल आएगा या चौथे में, और इसी से यह भी तय होता है कि कामगार उस नौकरी में कितने समय टिकता है।
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