यूरोप का लॉन्ग स्टे D वीज़ा, भारत से आवेदन, दस्तावेज और समय
भारत से यूरोप के राष्ट्रीय D वीज़ा का आवेदन VFS Global केंद्र पर जमा होता है, और जर्मन मिशन के अनुसार फाइल को दूतावास तक पहुंचने में 6 कार्य दिवस तक लगते हैं।
D वीज़ा यूरोप का राष्ट्रीय वीज़ा है, जो 90 दिन से ज्यादा रहने के लिए दिया जाता है। भारत से आवेदन उस देश के मिशन के लिए तय VFS Global केंद्र पर जमा होता है, आपके निवास स्थान के हिसाब से। रोजगार वाली फाइलों में गंतव्य देश के श्रम या प्रवासन कार्यालय की सहमति भी जरूरी होती है।
D वीज़ा और Schengen C वीज़ा एक चीज़ नहीं हैं
Schengen Visa Code (Regulation 810/2009) छोटी अवधि के C वीज़ा को नियंत्रित करता है, यानी किसी भी 180 दिन की अवधि में अधिकतम 90 दिन का ठहराव। D वीज़ा उस नियम के दायरे से बाहर है। इसे हर सदस्य देश अपने राष्ट्रीय कानून के तहत जारी करता है, इसलिए दस्तावेजों की सूची, शुल्क और प्रक्रिया का समय जर्मनी, नीदरलैंड्स और चेक गणराज्य में एक जैसे नहीं होते।
भारत में जर्मन मिशन इस अंतर को स्पष्ट लिखता है। छोटी अवधि के वीज़ा में जो सुविधाएं मिलती हैं, जैसे कुछ मामलों में किसी भी केंद्र पर फाइल जमा करने की छूट, वे राष्ट्रीय वीज़ा पर लागू नहीं होतीं। राष्ट्रीय वीज़ा के आवेदक को उसी VFS केंद्र पर जाना पड़ता है जो उसके निवास क्षेत्र के लिए तय है। पुणे में रहने वाला उम्मीदवार मुंबई के अधिकार क्षेत्र में आता है, और गलत केंद्र पर पहुंचने का नतीजा आमतौर पर फाइल वापस लौटना और नई अपॉइंटमेंट लेना होता है।
दूसरा फर्क अधिकार का है। C वीज़ा पर फैसला दूतावास अकेले लेता है। रोजगार आधारित D वीज़ा पर दूतावास तब तक आगे नहीं बढ़ता जब तक गंतव्य देश का श्रम या प्रवासन कार्यालय अपनी सहमति न दे दे। जर्मनी में यह भूमिका Bundesagentur für Arbeit की होती है, चेक गणराज्य में श्रम कार्यालय की रिक्ति रजिस्टर वाली शर्त लागू होती है, और नीदरलैंड्स में मान्यता प्राप्त प्रायोजक की स्थिति मायने रखती है। यही सहमति ज्यादातर मामलों में कुल समय तय करती है, वीज़ा काउंटर नहीं।
VFS पर आवेदन कैसे चलता है, और कौन सा समय किसमें गिना जाता है
VFS Global दूतावास का सेवा साझेदार है, फैसला लेने वाला नहीं। केंद्र पर आपकी फाइल ली जाती है, बायोमेट्रिक लिए जाते हैं, शुल्क लिया जाता है और फिर बैग दूतावास भेजा जाता है। भारत में जर्मन मिशन के अनुसार, केंद्र से दूतावास तक आवेदन पहुंचने में 6 कार्य दिवस तक लग सकते हैं, और यह अवधि दूतावास की प्रक्रिया अवधि में नहीं गिनी जाती। यानी जिस दिन आपने फाइल जमा की, उस दिन से घड़ी शुरू नहीं होती।
शुल्क की तरफ भी दो अलग रकमें होती हैं। राष्ट्रीय वीज़ा का सरकारी शुल्क जर्मन मिशन के अनुसार 75 यूरो है, जो आवेदन के दिन के विनिमय दर पर रुपये में लिया जाता है। इसके ऊपर VFS का सेवा शुल्क अलग से लगता है, और कूरियर या SMS जैसी वैकल्पिक सेवाओं का शुल्क भी अलग है। अस्वीकृति की स्थिति में वीज़ा शुल्क वापस नहीं होता।
| चरण | कौन करता है | अनुमानित समय |
|---|---|---|
| अनुबंध और नियोक्ता के दस्तावेज तैयार करना | नियोक्ता और उम्मीदवार | 2 से 4 सप्ताह |
| श्रम या प्रवासन कार्यालय की सहमति | गंतव्य देश का प्राधिकरण | कई हफ्ते, देश पर निर्भर |
| VFS अपॉइंटमेंट और फाइल जमा करना | उम्मीदवार | अपॉइंटमेंट की उपलब्धता पर निर्भर |
| केंद्र से दूतावास तक फाइल पहुंचना | VFS Global | 6 कार्य दिवस तक (जर्मन मिशन भारत) |
| दूतावास का फैसला | दूतावास | राष्ट्रीय नियम के अनुसार |
देश दर देश यह कुल अवधि कितनी अलग होती है, इसका ब्योरा देश दर देश समयरेखा में है। जर्मनी की नियोक्ता वाली श्रृंखला अलग से जर्मनी का निवास परमिट में समझाई गई है।
दस्तावेजों की सूची और वे जगहें जहां फाइल अटकती है
दूतावास की चेकलिस्ट हर देश की अपनी होती है, पर रोजगार आधारित D वीज़ा में लगभग हमेशा यही समूह मांगा जाता है।
- हस्ताक्षरित रोजगार अनुबंध, जिसमें पद, वेतन और काम के घंटे लिखे हों, और वही वेतन जो प्राधिकरण की सहमति में दर्ज है।
- शैक्षिक और व्यावसायिक प्रमाणपत्र, अपोस्टिल के साथ। भारत में अपोस्टिल Ministry of External Affairs लगाता है, और उससे पहले राज्य का प्रमाणन जरूरी होता है।
- पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, जिसकी वैधता अवधि सीमित होती है, इसलिए इसे बहुत जल्दी लेना भी नुकसान करता है।
- यात्रा और आरंभिक अवधि का स्वास्थ्य बीमा, तथा गंतव्य में आवास का प्रमाण।
- पासपोर्ट, जिसकी बची हुई वैधता और खाली पन्नों की शर्त दूतावास की चेकलिस्ट में लिखी होती है।
सबसे आम दो गलतियां तकनीकी हैं। पहली, अनुबंध का वेतन और प्राधिकरण की सहमति का वेतन अलग होना। दोनों संख्याएं मेल नहीं खातीं तो फाइल लौटती है और सहमति दोबारा लेनी पड़ती है, जिसमें हफ्ते जाते हैं। दूसरी, अपोस्टिल का गलत क्रम। सीधे Ministry of External Affairs भेजा गया प्रमाणपत्र राज्य के प्रमाणन के बिना स्वीकार नहीं होता, और यह पता अक्सर तब चलता है जब उम्मीदवार पहले से VFS अपॉइंटमेंट ले चुका होता है।
इन रास्तों पर एक ही directive के तहत भी दस्तावेज अलग दिखते हैं, जैसा सिंगल परमिट में समझाया गया है।
D वीज़ा की योजना उल्टी दिशा में बनती है। पहले गंतव्य देश के श्रम कार्यालय की सहमति की अवधि देखें, उसमें अपोस्टिल और पुलिस क्लीयरेंस का समय जोड़ें, फिर VFS अपॉइंटमेंट की उपलब्धता और केंद्र से दूतावास तक के 6 कार्य दिवस जोड़ें। शुरुआत की तारीख इसी जोड़ से निकलती है, दूतावास की घोषित प्रक्रिया अवधि से नहीं।
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