भारतीय दस्तावेज़ों का अपोस्टिल, यूरोप के वर्क परमिट के लिए
विदेश मंत्रालय अपोस्टिल के लिए प्रति दस्तावेज़ 50 रुपये लेता है और आवेदन चार अधिकृत एजेंसियों से जाता है, जिनका शुल्क 84 रुपये प्रति दस्तावेज़ है।
यूरोपीय संघ का कोई भी परमिट कार्यालय भारतीय डिग्री या जन्म प्रमाणपत्र को सीधे स्वीकार नहीं करता। उस पर विदेश मंत्रालय का अपोस्टिल चाहिए। भारत 1961 की Hague Convention से 2005 में जुड़ा था। मंत्रालय अपोस्टिल के लिए प्रति दस्तावेज़ 50 रुपये लेता है, और आवेदन केवल चार अधिकृत एजेंसियों के रास्ते जाता है।
यह छोटा सा शुल्क कई फाइलों को हफ्तों पीछे धकेल देता है, इसलिए नहीं कि महंगा है, बल्कि इसलिए कि इसका क्रम उलटा कर दिया जाता है। अपोस्टिल पहला कदम नहीं, आखिरी कदम है। उससे पहले राज्य स्तर पर सत्यापन होना चाहिए।
क्रम और शुल्क
विदेश मंत्रालय के अनुसार दस्तावेज़ पहले Regional Authentication Centre में जाते हैं, जहां राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश या वाणिज्य मंडल के नामित हस्ताक्षरकर्ता उन्हें प्रमाणित करते हैं। शैक्षिक दस्तावेज़ राज्य के शिक्षा विभाग से, व्यक्तिगत दस्तावेज़ गृह विभाग या SDM से, और वाणिज्यिक दस्तावेज़ वाणिज्य मंडल से। इसके बाद ही मंत्रालय का अपोस्टिल लगता है।
मंत्रालय अब व्यक्तियों से सीधे दस्तावेज़ नहीं लेता। जमा और वापसी चार आउटसोर्स एजेंसियों से होती है: BLS International Services, Superb Enterprises, IVS Global Services और Alhind Tours and Travels।
| चरण | कौन करता है | शुल्क |
|---|---|---|
| राज्य स्तर पर सत्यापन | राज्य शिक्षा या गृह विभाग, या वाणिज्य मंडल | राज्य के अनुसार अलग |
| अपोस्टिल | विदेश मंत्रालय | 50 रुपये प्रति दस्तावेज़ |
| जमा और वापसी | चार अधिकृत एजेंसियां | 84 रुपये प्रति दस्तावेज़ और 3 रुपये प्रति पृष्ठ स्कैनिंग |
| गंतव्य देश का अनुवाद | शपथबद्ध या न्यायालय अनुवादक | देश के अनुसार अलग |
| परमिट पर फैसला, Croatia | गृह मंत्रालय, Aliens Act की धारा 91(8) | पूरी फाइल पर 90 दिन तक |
मंत्रालय अपने पृष्ठ पर समय की कोई गारंटी नहीं देता, केवल यह लिखता है कि सत्यापन और प्रसंस्करण में समय लगता है इसलिए पहले से आवेदन करें। यह सावधानी की भाषा नहीं है, यह एक संकेत है कि राज्य वाला चरण ही असली कतार है।
अपोस्टिल के बाद जो काम बचता है
अपोस्टिल यह प्रमाणित करता है कि दस्तावेज़ पर जो हस्ताक्षर और मुहर है वह असली है। यह नहीं बताता कि दस्तावेज़ में लिखा क्या है। इसलिए लगभग हर सदस्य देश एक दूसरा कदम मांगता है: उस देश की भाषा में अनुवाद, जो आम तौर पर वहां के शपथबद्ध या न्यायालय अनुवादक से होना चाहिए। Bulgaria में तो प्रवेश की शर्त ही यह है कि योग्यता का दस्तावेज़ Bulgarian में अनुवादित हो और अनुवादक का हस्ताक्षर नोटरी से प्रमाणित हो।
तीसरा कदम कुछ पेशों में आता है: योग्यता की मान्यता। Czechia का Employee Card रास्ता हो या Germany का Anerkennung, यह एक अलग प्रक्रिया है जो अपोस्टिल के बाद शुरू होती है। Czech प्रक्रिया की शर्तें Czech Employee Card में दर्ज हैं।
वह देरी जो हर बार एक ही जगह होती है
व्यावहारिक तस्वीर यह है। नियोक्ता मार्च में प्रस्ताव देता है, कर्मचारी अप्रैल में डिग्री की प्रति भेजता है, और परमिट कार्यालय जून में फाइल लौटा देता है क्योंकि डिग्री पर अपोस्टिल नहीं है। अब राज्य के शिक्षा विभाग से सत्यापन शुरू होता है, फिर एजेंसी के ज़रिए मंत्रालय, फिर अनुवाद। पूरी फाइल जुलाई में दोबारा जमा होती है, और गंतव्य देश की 90 दिन वाली घड़ी वहीं से नए सिरे से चलती है। जो कर्मचारी मई में पहुंच सकता था, वह अक्तूबर में पहुंचता है।
इसका उपाय क्रम में है। जिस दिन नौकरी की बात गंभीर हो उसी दिन डिग्री, दसवीं का प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र और पुलिस प्रमाणपत्र राज्य सत्यापन में डाल दें, भले ही परमिट की सूची अभी न आई हो। ये चार दस्तावेज़ लगभग हर यूरोपीय फाइल में मांगे जाते हैं। किन कारणों से फाइलें ठुकराई जाती हैं यह परमिट अस्वीकार होने के कारण में है, और अनुबंध में क्या जांचना है यह रोज़गार अनुबंध की जांच में। नियोक्ता किस चरण की ज़िम्मेदारी लेता है, यह नियोक्ताओं के लिए पन्ने पर दर्ज है।
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